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पीड़िता ने एडीजी पर पद का दुरुपयोग कर कार्यवाही प्रभावित करवाने के लगाए आरोप


पीड़िता के आरोप गंभीर लेकिन पुलिस ने नहीं चलाए तीर
एडीजी विजय कुमार मौर्या पर पीड़िता ने कार्यवाही में दखल करने के लगाए आरोप
लखनऊ पुलिस के जिम्मेदारों से आरोपी की पैरवी कर कार्यवाही प्रभावित करवाने का आरोप
एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया था संज्ञान, किया था नौकरी से बर्खास्त
पीड़िता ने पुनः मुख्यमंत्री कार्यालय में दर्ज करवाई शिकायत, कार्रवाई न होने का लगाया आरोप

लखनऊ: राजधानी लखनऊ में पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात आईपीएस ऑफिसर डीके ठाकुर तैनाती के बाद से लगातार अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं, वो सप्ताह में कम से कम 2 बार सर्कल/थानेवार कार्यशैली की मॉनीटरिंग करते हैं और खासतौर से उनका जोर महिलाओं और बच्चियों से जुड़े अपराधों के खात्मे और दर्ज मामलों में हुई कार्रवाई पर होता है, इस दौरान वो थानों में दर्ज किए गए मामलों की विवेचना पर भी खासा जोर देते हैं और साफ शब्दों में निर्देश देते हैं कि हर पहलू को मद्देनजर रखते हुए त्वरित गति से विवेचना पूरी कर चार्जशीट फ़ाइल की जाए, जिससे आरोपी को जल्द से जल्द सजा मिल सके।

लखनऊ पुलिस के विवेचक का खेल आया सामने

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व पुलिस कमिश्नर लखनऊ ध्रुवकान्त ठाकुर के मंसूबों पर राजधानी लखनऊ में तैनात कुछ विवेचक पानी फेरते नजर आ रहे हैं। एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें एफआईआर दर्ज किए हुए तो एक साल पूरा हो गया लेकिन कार्रवाई अभी तक शून्य है। आज तक विवेचक ने किसी भी अपराधी को जेल भेजने तक की हिम्मत नहीं की। जिसकी पोल खोलते हुए पीड़िता ने बताया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि आरोपी को बचाने वाले उत्तरप्रदेश पुलिस में कार्यरत एक अपर पुलिस महानिदेशक ही हैं। पुलिस कमिश्नर लखनऊ ध्रुवकान्त ठाकुर को दिए शिकायती पत्र में पीडिता ने साफ शब्दों में एडीजी विजय कुमार मौर्या पर यह आरोप लगाया है और कहा है कि उनके चलते न तो मामले में अब तक उचित कार्रवाई की गई और न ही अभी भी की जा रही है।

विवेचक ने नहीं किया अपने दायित्वों का निर्वहन:

पीड़िता ने सीपी को दिए गए शिकायती पत्र में कहा है कि FIR No. 142/2020 दिनांक 19.01.2020, धारा अंतर्गत 498A, 323, 504, 506, 354, 380, 376, 511, 377, 420, 467, 468, 494 IPC थाना गोमती नगर लखनऊ जिसकी प्रार्थिनी वादिनी व पीड़िता है।पीड़िता द्वारा योजित एक IGRS के संदर्भ में सहायक पुलिस आयुक्त गोमती नगर, अपनी दिनांक 12.03.2021 अख्या में यह उल्लेख किया गया है कि विवेचक उपनिरीक्षक बालेश्वर प्रसाद द्वारा आरोप पत्र दिनांक 11.03.2021 को किता किया गया है। स्पष्ट है कि विवेचक द्वारा किसी भी अभियुक्त की गिरफ़्तारी नही की गयी है। विवेचक द्वारा FIR लिखने की तिथि 19.01.2020 से दिनांक 11.03.2021 तक कोई मात्र अंतिम दिनो में ही पर्चा किता किया गया है। और दिनांक 19.01.2020 से 19.01.2021 तक कोई भी पर्चा किता नही किया गया है। मेरे द्वारा दिए गए साक्ष्यों को विवेचना में समाहित नही किया गया। जिसके कारण मुझे मजबूरन ईमेल के माध्यम से साक्ष्य प्रेषित किया गया। जबकि जब भी विवेचक की निष्क्रियता के सम्बंध में शिकायत की गयी तब यह आख्या प्रेषित की गयी कि विवेचना प्रचलित है जबकि कोई भी विवेचना का कार्य नही किया गया। पूर्व में इस विवेचक बालेश्वर प्रसाद द्वारा FIR No. 982/2019 थाना गोमती नगर की विवेचना भी बिना जाँच किए अभियुक्त संतोष कुमार मौर्या को लाभ पहुंचाने के उद्देश्यअंतिम रिपोर्ट लगाकर समाप्त किया गया था। पुन: विवेचना पर अन्य विवेचक द्वारा सही विवेचना करके अंतिम रिपोर्ट को समाप्त कर आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया। स्पष्ट है कि विवेचक बालेश्वर प्रसाद द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन नही किया गया है।

कूटरचना कर परिवार रजिस्टर से पीड़िता व बेटी का नाम हटाया

पीड़िता ने बताया कि विवेचक की शिथिलता की वजह से अभियुक्तगण मेरे ससुर के परिवार रजिस्टर से मेरा और मेरी बेटी का नाम आपराधिक साजिस के तहत मुझे अभियोजन का भय देकर मेरे द्वारा योजित FIR को वापस लेने का दबाव डाल कर एक FIR No.17/2020 दिनांक 04.02.2020 थाना अतरौलिया आज़मगढ़ में योजित किया गया और मेरी शिकायत पर पुलिस महा निरीक्षक आज़मगढ़ के आदेश के बाद पाया गया कि अभियुक्त गण ने परिवार रजिस्टर में कूट रचना की गयी है और यह भी पाया गया कि FIR No.17/2020 में आरोप पत्र किता कर दिया गया जिसको पुलिस अधीक्षक एवं महा निरीक्षक आज़मगढ़ द्वारा रोका गया और मेरी FIR No. 65/2020 दिनांक 24.06.2020 लिखी गयी। फोरेंसिच आख्या से स्पष्ट है कि कूट रचना की गयी है। इसके अलावा अभियुक्तों ने मेरे बेटी को मुझसे मेरी अभिरक्षा से मेरी मर्ज़ी एवं अन्य अपराध करके मुझ पर दबाव डाला गया जिसके सम्बंध में मेरे द्वारा FIR लिखने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया जो नही लिखे जाने पर न्यायालय के आदेश के क्रम में FIR No. 76 / 2021 थाना गोमती नगर विस्तार लिखी गयी ।

विवेचक की ही शिथिलता के कारण आए दिन करते हैं पिटाई:

पीड़िता ने बताया कि न्यायालय में मध्यस्थता असफल होजाने के आक्रोश में दिनांक 13.01.2021 को मुझे मारने पिटने इत्यादि अपराध के सम्बंध में FIR No.18 / 2021 दिनांक 13.01.2021, थाना गोमती नगर विस्तार, लिखी गयी। इसके अलावा दिनांक 13.03.2021 लगभग 9 बजे सुबह मुझे प्रताड़ित करने के लिए मुझे किचन में खाना बनाने में परेशानी उत्तपन्न करने की नियत से संतोष कुमार मौर्या की सह पर उनकी माँ बुधा देवी और उनकी बेटी अंकिता मौर्या किचन के सभी चूल्हे को जान बुझ कर फँसा रखा था और इसके साक्ष्य के लिए जब मैं वीडियो बना रही थी तब अंकिता ने मुझे थप्पड़ मारा। मुझे चिमटा गरम करके दिखाकर धमका रही थी। ऐसा ये लोग आए दिन ऐसा करते हैं। विशेष रूप से अवगत करना है प्रदीप सिंह विवेचक एफ.आई.आर. संख्या 17/2020 दिनांक 04.02.2020 द्वारा क्षेत्राधिकारी बुधनपुर की उपस्थिति में दिनांक 24.06.2020 एवं 05.03.2021 को मुझसे बताया कि FIR No.17/2020 में आरोप पत्र पुलिस अधीक्षक ग्रामीण क्षेत्र (एस॰पी॰-आर॰ए॰) के कहने पर प्रेषित किया था। इस प्रकरण में एक अन्य पुलिस अधिकारी विजय कुमार मौर्या अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा बार-बार विवेचना को अभियुक्त संतोष कुमार मौर्या के कहने पर प्रभावित किया गया है।

एडीजी विजय कुमार मौर्या पर लगे गम्भीर आरोप:

पीड़िता ने बताया कि अब जब बिना गिरफ़्तारी और विवेचना सही से किए बिना FIR No. 142/2020 दिनांक 19.01.2020, धारा अंतर्गत 498A, 323, 504, 506, 354, 380, 376, 511, 377, 420, 467, 468, 494 IPC थाना गोमती नगर लखनऊ में आरोप पत्र प्रेषित किया गया है तो यह पुष्ट हो जाता है कि विवेचना को प्रभावित करने के लिए अपर पुलिस महानिदेशक बिजय कुमार मौर्या द्वारा अनुचित दबाव का प्रयोग किया गया है। आख्या किन धाराओं मे आरोप पत्र किता किया गया यह उजागर नही किया गया है न ही यह बताया गया है की किन धाराओं का लोप किया गया है। शिथिलता और कोई गिरफ़्तारी व उचित पर्वेक्षण न किया जाना उच्च अधिकारियों विशेषत्या बिजय कुमार मौर्या ADG का कुप्रभाव स्पष्ट कर देता है और विवेचक द्वारा मुकदमों में आरोपियों को अनुचित लाभ भ्रष्टाचार करके पहुँचाया गया है एवं अभी भी ऐसा ही किया जा रहा है। मुझ पीड़ित व मुकदमा वादिनी को न्याय दिलाया जाए।

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