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दिल्ली: पीएम की सुरक्षा में चूक मामले में SC में हुई सुनवाई, जानें क्या निकला निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट में प्रधानमंत्री मोदी के पंजाब दौरे के दौरान सुरक्षा में हुई चूक की जांच की मांग वाली याचिका पर आज हुई सुनवाई, सोमवार को मामले की अगली सुनवाई

दिल्ली: 7 जनवरी 2022: देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा में पंजाब में हुई चूक मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। याचिकाकर्ता के वकील मनिदर सिंह ने बहस की शुरुआत करते हुए मामले की जांच की। श्री सिंह ने कहा कि भटिंडा, फिरोजपुर और PM के आगे की यात्रा से संबंधित सभी दस्तावेज जांच के लिए संरक्षित रखने की जरूरत है।

SG ने कहा कि इस मामले की जांच में NIA के अधिकारी का होना जरूरी है क्योकि जुडिशल अधिकारी इस मामले में पूरी तरह सक्षम नहीं होगा। इसके लिए NIA के पेशेवर अधिकारी का जांच में होना जरूरी है। SG ने पंजाब सरकार की तरफ से गठित समिति पर कहा कि पंजाब सरकार ने जो जांच समिति गठित की है उसमें एक सचिव हैं जो सरकार के दबाव में आ सकते हैं।

इस पर पंजाब सरकार के वकील पटवालिया ने कहा – राज्य इस मुद्दे पर गंभीर है उसी दिन हमने जांच कमेटी गठित कर दी है।

SG ने कहा कि पीएम की सुरक्षा में चूक जिसमें राज्य शासन और पुलिस प्रशासन दोनों पर जिम्मेदारी थी उसकी जांच राज्य सरकार नहीं कर सकती। मामले की जांच में NIA अधिकारियों का शामिल होना अनिवार्य है।

SG से मामले की जांच में पंजाब के गृह सचिव के शामिल होने पर सवाल उठाते हुए कहा पंजाब के गृह सचिव खुद जांच और शक के दायरे में हैं वो कैसे जांच टीम का हिस्सा हो सकते हैं?

मनिंदर सिंह ने कहा को पहला तो सबूतों को सुरक्षित रखा जाए। इसके लिए भटिंडा के डिस्ट्रिक्ट जज और NIA अधिकारी मिलकर इस मामले में सबूतों को सुरक्षित करें।
दूसरा सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले की मॉनीटर करें। NIA के अधिकारी के द्वारा जांच की जाए। इसके अलावा इस मामले में एक दिशा निर्देश जारी करे ताकि भविष्य में दोबारा ऐसा न होने पाए।

वही SG तुषार मेहता ने कहा कि यह रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मामला है और बहुत गंभीर है। यह सीमापार आतंकवाद का मामला हो सकता है। इसलिए इसे उसी आधार पर ट्रीट किया जाना चाहिए।

सारी दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्योंकि मामला पीएम की सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए हम पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को रिकॉर्ड संरक्षित करने का आदेश देते हैं। पंजाब सरकार उनसे सहयोग करे। हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल चंडीगढ़ के डीजी का सहयोग लें, NIA के भी एक वरिष्ठ अधिकारी को जांच टीम में होने के लिए निर्देशित करते हुए सोमवार को मामले की अगली सुनवाई के लिए कहा है। इसके साथ ही SC ने फिलहाल “पीएम सुरक्षा चूक मामले में” राज्य और केंद्र के द्वारा बनाई गई अलग-अलग कमिटी को अपना काम रोकने के लिए निर्देशित किया है।

सुनवाई के दौरान किस पक्ष से किसने क्या-क्या कहा, नीचे पूरी बहँस विस्तार से पढें

वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह- यह कानून – व्यवस्था का मामला नहीं है, संसद से पास SPG एक्ट के पालन का मामला है , इसे कोर्ट ने भी मंजूरी दी थी , एक्ट की धारा 14 कहती है कि केंद्र , राज्य और हर सरकारी विभाग को इसके आदेश का पालन करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह – पीएम को बठिंडा से फ़िरोज़पुर जाते समय 20 मिनट रुकना पड़ा । यह बहुत गंभीर बात है । मैं राज्य सरकार पर टिप्पणी नहीं करना चाहता । इसकी जांच राज्य नहीं कर सकता।

वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह- राज्य सरकार ने जो कमिटी बनाई है उसके अध्यक्ष पर भी सवाल हैं । सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन में हुए भ्रष्टाचार में उस जज के आदेश को संदिग्ध मानते हुए पलट दिया था।

मनिंदर सिंह- सारे रिकॉर्ड कोर्ट के संरक्षण में लिए जाएं। बठिंडा के जिला जज या कोई और जज NIA के सहयोग से ऐसा करें।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता- मैं आभारी हूँ कि कोर्ट ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लिया। यह दुर्लभ मामला है।

वकील मनिंदर सिंह – मेरी मांग है कि “सबूतों के संरक्षण हो, सही जांच हो सुप्रीम कोर्ट निगरानी करे ज़िला जज NIA का सहयोग लें, जवाबदेही तय हो, भविष्य के लिए निर्देश तय किए जाएं।

मेहता- जब पीएम को सड़क मार्ग से जाना होता है तो SPG DGP से पूछती है। जब सड़क पर ब्लॉक था तो मंजूरी क्यों दी गई। एक कार 500 मीटर आगे चलती है। जो पुलिसवाले प्रदर्शनकारियों के साथ चाय पी रहे थे, उन्होंने उस कार को भी सूचना नहीं दी कि पीएम को आगे आने से रोक दीजिए।

मेहता- वहां धार्मिक जगह से फ़्लाईओवर के दूसरी तरफ भी भीड़ जमा करने की घोषणा हो रही थी। यूएस से चलने वाला एक आतंकी संगठन वीडियो जारी कर रहा है। वहां कुछ ऐसा हो सकता था जो भारत की अंतर्राष्ट्रीय शर्मिंदगी की वजह बनता।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता- मैं आभारी हूँ कि कोर्ट ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लिया , यह दुर्लभ मामला है।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता- जब पीएम को सड़क मार्ग से जाना होता है तो SPG DGP से पूछती है । उनकी हरी झंडी के बाद ही यात्रा शुरू हो सकती है । जब सड़क पर ब्लॉक था तो मंजूरी क्यों दी गई।

तुषार मेहता – एक कार 500 मीटर आगे चलती है , जो पुलिसवाले प्रदर्शनकारियों के साथ चाय पी रहे थे , उन्होंने उस कार को भी सूचना नहीं दी कि पीएम को आगे आने से रोक दीजिए।*

तुषार मेहता- अमेरिका से चलने वाला एक आतंकी संगठन वीडियो जारी कर रहा है , वहां कुछ ऐसा हो सकता था जो भारत की अंतर्राष्ट्रीय शर्मिंदगी की वजह बनता।

तुषार मेहता- हम पंजाब की तरफ से बनाई गई कमिटी के पक्ष में नहीं हैं । उसमें गृह सचिव हैं जो खुद भी संदिग्ध हो सकते हैं , कोर्ट सारे रिकोर्ड अपने पास ले।

पंजाब के एडवोकेट जनरल डी एस पटवालिया : हम मामले को गंभीरता से ले रहे हैं’ हमने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की कमिटी बनाई है, कल फिरोजपुर में FIR भी दर्ज की गई है केंद्र ने भी एक कमिटी बनाई है। राज्य के अधिकारियों को तलब किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में पंजाब के एडवोकेट जनरल डीएस पटवालिया- अगर राज्य की कमिटी पर एतराज है तो सुप्रीम कोर्ट जैसी चाहे कमिटी बना सकता है , अगर हमारी कमिटी पर एतराज़ है तो केंद्र की कमिटी में भी एसपीजी के एस सुरेश हैं उन्हें भी जांच कैसे करने दी जा सकती है ?

CJI- दोनों सरकारों ने कमिटी बनाई है। एक – दूसरे की कमिटी पर सवाल भी उठा रहे हैं।

मेहता- अगर SPG के IG के हमारी कमिटी में होने से दिक्कत है तो हम उनकी जगह गृह सचिव को रख देंगे।

CJI – पर एक ही मामले की 2 तरह की जांच क्या सही होगी ?

तुषार मेहता – यह सुरक्षा में कमी पर हमारी आंतरिक जांच है ।CJI- क्या आप निष्पक्ष जांच की मांग से सहमत हैं ?

मेहता- पहले रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं । इस पहलू पर कोर्ट सोमवार को विचार कर ले।

रिकॉर्ड संरक्षित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को कहा

सारी दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमने सभी वकीलों को सुना । मामला पीएम की सुरक्षा से जुड़ा है इसलिए हम पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को रिकॉर्ड संरक्षित करने का आदेश देते हैं। पंजाब सरकार उनसे सहयोग करे। साथ ही हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल चंडीगढ़ के डीजी का सहयोग लें, NIA के भी एक वरिष्ठ अधिकारी भी टीम में शामिल हों, सोमवार को इसी मामले की अगली सुनवाई होगी। फिलहाल राज्य और केंद्र की कमिटी अपना काम रोक दें, हम यह बात आदेश में दर्ज नहीं कर रहे, लेकिन दोनों कमिटियों को यह सूचित कर दिया जाए।

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