
- सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने CM योगी आदित्यनाथ को लिखा पत्र
- यूपी के स्कूलों में AI, डिजिटल लिटरेसी और साइबर सिक्योरिटी शिक्षा शुरू करने का प्रस्ताव
- “UP AI और डिजिटल एजुकेशन मिशन” शुरू करने की मांग
- कक्षा 6 से AI और कोडिंग शिक्षा लागू करने का सुझाव
- स्कूलों में AI और डिजिटल इनोवेशन लैब्स स्थापित करने का प्रस्ताव
- IIT कानपुर जैसे संस्थानों से टीचर ट्रेनिंग कराने की सिफारिश
- छात्रों को साइबर सेफ्टी और डेटा प्रोटेक्शन की शिक्षा देने पर जोर
- AI शिक्षा से फ्यूचर जॉब्स और इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा
- उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी और AI हब बनाने की दिशा में पहल
लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक Rajeshwar Singh ने उत्तर प्रदेश के स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल लिटरेसी और साइबर सिक्योरिटी शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को पत्र लिखकर एक व्यापक शिक्षा मिशन शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का कहना है कि तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी और डिजिटल अर्थव्यवस्था के दौर में छात्रों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य के स्कूलों में शुरुआती स्तर से ही एआई, कोडिंग और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी शिक्षा शुरू की जानी चाहिए।
AI रिवोल्यूशन बदल रही वैश्विक अर्थव्यवस्था
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पत्र में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने जा रही है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक AI वैश्विक अर्थव्यवस्था में 15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का योगदान दे सकती है।
उन्होंने बताया कि आज के समय में कंपनियां कर्मचारियों की AI टूल्स को समझने और उपयोग करने की क्षमता को करियर ग्रोथ और प्रमोशन के लिए महत्वपूर्ण मान रही हैं। ऐसे में अगर छात्रों को स्कूल स्तर पर ही AI और डिजिटल तकनीकों की शिक्षा दी जाए तो वे भविष्य की अर्थव्यवस्था में बेहतर भूमिका निभा सकते हैं।
“UP AI और डिजिटल एजुकेशन मिशन” शुरू करने का प्रस्ताव
विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में “उत्तर प्रदेश AI और डिजिटल एजुकेशन मिशन” शुरू करने का प्रस्ताव भी दिया है। इस मिशन का उद्देश्य राज्य के छात्रों को आधुनिक तकनीकी कौशल से लैस करना होगा।
प्रस्तावित मिशन के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की बात कही गई है, जैसे-
- कक्षा 6 से AI और कोडिंग शिक्षा की शुरुआत
- स्कूलों में AI और डिजिटल इनोवेशन लैब्स की स्थापना
- शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
- तकनीकी संस्थानों और उद्योगों के साथ सहयोग
डॉ. राजेश्वर सिंह ने सुझाव दिया कि शिक्षक प्रशिक्षण के लिए देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों, जैसे Indian Institute of Technology Kanpur का सहयोग लिया जा सकता है, ताकि शिक्षकों को आधुनिक तकनीक के अनुरूप तैयार किया जा सके।
साइबर सिक्योरिटी शिक्षा अब समय की जरूरत
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पत्र में कहा कि आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध और साइबर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में छात्रों को साइबर सुरक्षा, डेटा प्रोटेक्शन और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने हाल ही में मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी Stryker Corporation पर हुए साइबर हमले का भी जिक्र किया, जिसे कथित रूप से हैकिंग ग्रुप Handala Hackers से जोड़ा गया है। इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता अब सिर्फ विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है।
उत्तर प्रदेश को टेक्नोलॉजी और AI हब बनाने की दिशा
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का मानना है कि अगर स्कूल स्तर पर ही छात्रों को AI और डिजिटल तकनीकों की शिक्षा दी जाए तो इससे न केवल युवाओं के लिए भविष्य की नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि राज्य में इनोवेशन और स्टार्टअप संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हब के रूप में विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।


































