भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही वजन घटाने वाली दवाओं, खासकर GLP-1 आधारित दवाओं को लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है। इन दवाओं के बढ़ते उपयोग पर देश के जाने-माने कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉ. नरेश त्रेहान ने चिंता जताते हुए कहा है कि ये दवाएं सामान्य लाइफस्टाइल प्रोडक्ट नहीं हैं, बल्कि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बनाई गई मेडिकल दवाएं हैं।
पिछले कुछ समय में इन दवाओं का पेटेंट समाप्त होने के बाद इनके सस्ते जेनेरिक वर्जन बाजार में आने लगे हैं। इसके चलते ऑनलाइन फार्मेसी और वेलनेस क्लीनिक के जरिए इनकी बिक्री में तेजी आई है। सोशल मीडिया पर तेजी से वजन घटाने के ट्रेंड ने भी इनकी मांग को बढ़ा दिया है, जिसके कारण लोग बिना डॉक्टर की सलाह के इनका उपयोग करने लगे हैं।
सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए देशभर में कार्रवाई शुरू की है। रिपोर्ट के अनुसार, कई जगहों पर छापेमारी की गई, जहां यह पाया गया कि इन दवाओं को बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेचा जा रहा था। इसके बाद ड्रग रेगुलेटर्स ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि ये दवाएं वजन घटाने में प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन इनके कई साइड इफेक्ट भी हैं। इनमें पैंक्रियाटाइटिस, मितली, उल्टी और लिवर पर प्रभाव जैसी गंभीर समस्याएं शामिल हो सकती हैं। डॉ. नरेश त्रेहान ने कहा कि बिना डॉक्टर की निगरानी के इन दवाओं का इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोग इसे आसान उपाय मानकर बिना एक्सरसाइज और डाइट के वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। उनका सुझाव है कि किसी भी दवा का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए और सेल्फ-मेडिकेशन से बचना चाहिए।
सरकार अब इन दवाओं के विज्ञापन और प्रमोशन पर भी सख्ती करने की तैयारी में है, खासकर गलत तरीके से किए जा रहे प्रचार और सरोगेट विज्ञापनों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। साथ ही, यह भी प्रस्ताव है कि इन दवाओं को केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा ही प्रिस्क्राइब किया जा सके।
निष्कर्ष:
वजन घटाने के आसान रास्ते के चक्कर में बिना सलाह दवा लेना खतरनाक साबित हो सकता है, इसलिए विशेषज्ञों और सरकार दोनों का संदेश साफ है—किसी भी दवा का इस्तेमाल केवल योग्य डॉक्टर की निगरानी में ही करें।


































