मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच United States ने Iran के खिलाफ बड़े स्तर पर सैन्य अभियान चलाने का दावा किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर 7000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है और यह अभियान पूरी तरह निर्णायक मोड़ पर है।
हेगसेथ ने कहा कि इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता, रक्षा उद्योग और नौसैनिक ताकत को कमजोर करना है, साथ ही उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना भी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि युद्ध अब अमेरिका की शर्तों पर खत्म होगा।
मिसाइल और ड्रोन हमलों में भारी गिरावट
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिकी बलों पर बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में करीब 90% की कमी आई है। ड्रोन हमलों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि ईरान अब पहले जैसी क्षमता से जवाब देने में सक्षम नहीं है।
नौसैनिक ताकत पर बड़ा वार
जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन Dan Kane ने बताया कि अमेरिकी सेना ने भूमिगत ठिकानों और सुरंगों पर भारी बम गिराए हैं। इसके अलावा ईरान की नौसैनिक शक्ति को भी निशाना बनाया गया है। दावा किया गया है कि 120 से ज्यादा जहाज या तो नष्ट हो चुके हैं या डूब गए हैं और पनडुब्बी बेड़ा लगभग निष्क्रिय हो गया है।
हवाई ताकत का जबरदस्त इस्तेमाल
इस अभियान में B-2 Spirit, B-52 Stratofortress और बी-1 जैसे लंबी दूरी के बॉम्बर विमान शामिल हैं, जो लगातार मिशन पर हैं। इसके अलावा AH-64 Apache हेलिकॉप्टर और A-10 विमान भी दक्षिणी मोर्चे पर सक्रिय हैं, खासकर Strait of Hormuz के आसपास।
ट्रंप पर निर्भर आगे की रणनीति
रक्षा मंत्री ने साफ किया कि इस ऑपरेशन को कब खत्म किया जाएगा, इसका अंतिम फैसला राष्ट्रपति Donald Trump ही लेंगे। फिलहाल अमेरिकी सेना अपनी तय रणनीति के अनुसार आगे बढ़ रही है।
अमेरिका ने इस अभियान में Saudi Arabia, United Arab Emirates, Qatar और Bahrain जैसे सहयोगी देशों की भूमिका को भी अहम बताया है।
कुल मिलाकर, अमेरिका का यह अभियान मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर रहा है और आने वाले समय में इसके वैश्विक असर देखने को मिल सकते हैं।


































