कोलेस्ट्रॉल कम करने और दिल की सेहत को बेहतर रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली स्टैटिन दवा Rosuvastatin को लेकर एक नई स्टडी में चिंता जताई गई है। इस शोध में किडनी पर इसके संभावित असर को लेकर अहम निष्कर्ष सामने आए हैं।
Johns Hopkins University के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में बताया गया कि जब इस दवा को पहली बार मंजूरी मिली थी, तब कुछ मरीजों में किडनी से जुड़े लक्षण—जैसे पेशाब में खून (हेमेट्यूरिया) और प्रोटीन (प्रोटीन्यूरिया)—देखे गए थे। ये संकेत किडनी के सामान्य रूप से काम न करने की ओर इशारा करते हैं।
इस नई स्टडी में करीब 9 लाख लोगों के हेल्थ रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। इनमें से लगभग 1.5 लाख लोग रोसुवास्टेटिन ले रहे थे, जबकि बाकी लोग दूसरी स्टैटिन दवा Atorvastatin का इस्तेमाल कर रहे थे। तीन साल तक दोनों समूहों की किडनी हेल्थ पर नजर रखी गई।
नतीजों में पाया गया कि रोसुवास्टेटिन लेने वाले करीब 2.9% लोगों में पेशाब के साथ खून आया, जबकि लगभग 1% लोगों में प्रोटीन की समस्या देखी गई। तुलना करने पर यह जोखिम Atorvastatin लेने वालों की तुलना में अधिक था।
रिसर्च के अनुसार, रोसुवास्टेटिन लेने वालों में हेमेट्यूरिया का खतरा 8% और प्रोटीन्यूरिया का खतरा 17% ज्यादा पाया गया। साथ ही गंभीर किडनी फेल्योर का जोखिम भी करीब 15% अधिक देखा गया, जिसमें डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।
स्टडी में यह भी सामने आया कि दवा की डोज बढ़ने के साथ जोखिम भी बढ़ता है। खासतौर पर उन मरीजों में ज्यादा खतरा देखा गया, जिनकी किडनी पहले से कमजोर थी। कुछ मामलों में ऐसे मरीजों को भी उच्च डोज दी जा रही थी, जो निर्धारित गाइडलाइंस के अनुरूप नहीं है।
हालांकि, दिल की सुरक्षा के मामले में रोसुवास्टेटिन और Atorvastatin दोनों ही दवाएं समान रूप से प्रभावी पाई गईं। यानी हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में दोनों का असर लगभग बराबर है।
डिस्क्लेमर:
यह जानकारी शोध और विशेषज्ञों के निष्कर्षों पर आधारित है। इसे चिकित्सा सलाह न मानें। किसी भी दवा को शुरू करने या बंद करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर परामर्श लें।


































