मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका द्वारा ईरान के खार्ग द्वीप पर संभावित हमले की चर्चाओं ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब पांच हफ्तों से चल रहे संघर्ष का असर अब केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरी दुनिया में तेल और ऊर्जा आपूर्ति पर भी दबाव डाल रहा है।
पूर्व विदेश राज्य मंत्री M. J. Akbar ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए आशंका जताई है कि यदि अमेरिका खार्ग द्वीप पर हमला करता है, तो यह संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में ईरान खाड़ी क्षेत्र के देशों जैसे दुबई और बहरीन में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा सकता है, जिससे क्षेत्रीय तनाव वैश्विक स्तर तक फैल सकता है।
उन्होंने कहा कि यह पारंपरिक “वर्ल्ड वॉर” जैसा नहीं होगा, बल्कि एक “वर्ल्ड वाइड वॉर” की शक्ल ले सकता है, जिसमें कई देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं।
अकबर के मुताबिक, इस संघर्ष ने ईरान की सैन्य और तकनीकी क्षमताओं को भी उजागर किया है। उन्होंने कहा कि शुरुआती आकलनों के विपरीत, यह युद्ध जल्दी खत्म नहीं हुआ और ईरान ने मजबूत प्रतिरोध दिखाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने इजरायल के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाकर अपनी रणनीतिक क्षमता का संकेत दिया है।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों के सामने सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। पहले ये देश काफी हद तक अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर थे, लेकिन अब उन्हें नए सुरक्षा ढांचे पर विचार करना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में क्षेत्रीय समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है।
मध्यस्थता के मुद्दे पर उन्होंने भारत की भूमिका को अहम बताया। उनका मानना है कि यदि भारत को शांति स्थापना के प्रयासों में शामिल होने का मौका मिलता है, तो उसे अपनी कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं, पाकिस्तान की भूमिका को उन्होंने सीमित बताते हुए कहा कि वह अधिकतर बाहरी शक्तियों के प्रभाव में रहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खार्ग द्वीप जैसे रणनीतिक स्थान पर किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति पर भी गहरा पड़ सकता है।


































