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मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार एक्शन में, इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप बना; राजनाथ सिंह करेंगे अगुवाई

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और उसके भारत पर संभावित प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप (अंतर-मंत्रालयी समूह) का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।

इस समूह में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं। इस कमेटी का उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे संकट से उत्पन्न होने वाले असर—खासकर ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक स्थिति और सुरक्षा—पर नजर रखना और आवश्यक कदम सुझाना है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ा है। हालांकि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। सरकार के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी में कटौती से करीब 10 रुपये प्रति लीटर तक के नुकसान की भरपाई हो जाती है, जिससे तेल कंपनियां बिना रुकावट के आपूर्ति जारी रख सकती हैं।

दुनिया के कई हिस्सों—जैसे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका—में ईंधन की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि भारत ने कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। सरकार का कहना है कि यह स्थिरता एक वित्तीय लागत के साथ आती है, जिसे वह वहन कर रही है ताकि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

इससे पहले, सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट को लेकर संसद भवन में सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी, जिसकी अध्यक्षता भी राजनाथ सिंह ने की थी। इस बैठक में सरकार ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया और ऊर्जा आपूर्ति तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट की। बताया गया कि भारत के जहाज वहां से सुरक्षित गुजर रहे हैं और सप्लाई को लेकर कोई बड़ी बाधा नहीं है।

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