HomeLucknowडॉ.राजेश्वर सिंह ने सीएम को भेजा बुजुर्गों के लिए प्रस्ताव : अब...

डॉ.राजेश्वर सिंह ने सीएम को भेजा बुजुर्गों के लिए प्रस्ताव : अब वरिष्ठ नागरिकों को “AI साथी मिशन” से सशक्त करने की पहल, जानें क्या है पूरी प्लानिंग जिससे बुजुर्ग भी रहें अपडेट

लखनऊ : सरोजनीनगर विधायक ने मुख्यमंत्री को भेजे अपने प्रस्ताव में स्पष्ट किया है कि तेजी से बढ़ती डिजिटल गवर्नेंस व्यवस्था में वरिष्ठ नागरिकों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आज पेंशन, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), राशन वितरण, स्वास्थ्य सेवाएं और बैंकिंग लेन-देन जैसे अधिकांश कार्य ऑनलाइन हो चुके हैं।
हालांकि इस बदलाव के साथ एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो तकनीकी जानकारी के अभाव में इन सुविधाओं का पूर्ण लाभ नहीं उठा पा रहा है। खासकर ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्ग डिजिटल प्लेटफॉर्म को समझने में कठिनाई महसूस करते हैं, जिससे वे सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं या दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं।

साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे से बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

प्रस्ताव में यह भी रेखांकित किया गया है कि देश में साइबर अपराधों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसमें वित्तीय धोखाधड़ी का प्रतिशत लगभग 75% तक पहुंच चुका है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिक इस प्रकार के अपराधों के लिए सबसे आसान निशाना बन रहे हैं।
कम डिजिटल जागरूकता, तकनीकी समझ की कमी और भरोसे की प्रवृत्ति के कारण बुजुर्ग अक्सर फर्जी कॉल, OTP फ्रॉड और ऑनलाइन स्कैम का शिकार हो जाते हैं। आने वाले वर्षों में जब उत्तर प्रदेश में 4 से 5 करोड़ वरिष्ठ नागरिक डिजिटल सेवाओं पर निर्भर होंगे, तब यह चुनौती और भी गंभीर हो सकती है।

“AI साथी मिशन” का उद्देश्य: सुरक्षित, स्मार्ट और आत्मनिर्भर बुजुर्ग

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ने “AI साथी – वरिष्ठ नागरिक डिजिटल सशक्तिकरण मिशन” का प्रस्ताव रखा है।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को तीन स्तरों पर सशक्त बनाना है-

  • Safe (सुरक्षित): साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल जोखिमों से बचाव
  • Smart (सक्षम): डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं का सही उपयोग
  • AI-enabled (आत्मनिर्भर): AI आधारित तकनीकों को समझकर उनका लाभ उठाना

इस पहल के जरिए बुजुर्गों को केवल तकनीक से परिचित कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ डिजिटल दुनिया में सक्रिय भागीदार बनाना लक्ष्य है।

हाइब्रिड ट्रेनिंग मॉडल: गांव से शहर तक पहुंचेगी डिजिटल शिक्षा

प्रस्तावित योजना में एक प्रभावी हाइब्रिड प्रशिक्षण मॉडल शामिल किया गया है, जिसमें ऑन-ग्राउंड और प्रैक्टिकल दोनों प्रकार की ट्रेनिंग दी जाएगी।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने सुझाव दिया है कि बैंक, जनसुविधा केंद्र और राशन दुकानों जैसे स्थानों पर अल्पकालिक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं, जबकि ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड स्तर पर नियमित और संरचित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं।
इन प्रशिक्षणों में साइबर सुरक्षा, मोबाइल ऐप्स का उपयोग, डिजिटल भुगतान, सरकारी पोर्टल्स की जानकारी और AI आधारित सेवाओं का व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा। “Use-based learning” मॉडल के जरिए बुजुर्गों को वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरणों के साथ सीखने का अवसर मिलेगा।

स्थानीय संसाधनों को जोड़कर बनेगा मजबूत नेटवर्क

इस मिशन की खास बात यह है कि इसमें स्थानीय स्तर पर पहले से मौजूद संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का सुझाव दिया गया है। बैंक मित्र, जनसुविधा केंद्र संचालक, पंचायत कर्मचारी और पुलिस बीट स्टाफ को इस अभियान में जोड़ा जाएगा, ताकि वे वरिष्ठ नागरिकों को समय-समय पर सही जानकारी और सहायता प्रदान कर सकें। इससे न केवल प्रशिक्षण का दायरा बढ़ेगा, बल्कि एक स्थायी और भरोसेमंद सहायता तंत्र भी विकसित होगा।

आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को भी मिलेगी मजबूती

प्रस्ताव में यह भी आग्रह किया गया है कि वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली पेंशन और अन्य आर्थिक सहायता योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाए। डॉ. राजेश्वर सिंह ने सुझाव दिया है कि संबंधित विभागों और मंत्रियों को एक ऐसा कार्यान्वयन मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए जाएं, जो व्यवहारिक, टिकाऊ और दीर्घकालिक हो। इससे बुजुर्गों को न केवल डिजिटल रूप से सशक्त किया जा सकेगा, बल्कि उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा भी मजबूत होगी।

लखनऊ से पायलट प्रोजेक्ट, पूरे प्रदेश में विस्तार की योजना

इस मिशन को जमीन पर उतारने के लिए ने लखनऊ में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही राज्य स्तर पर एक टास्क फोर्स गठित करने और 12 से 18 महीनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में इस योजना को लागू करने की बात कही गई है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह पूरे देश के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।

समावेशी विकास की दिशा में बड़ा कदम

डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने प्रस्ताव में स्पष्ट कहा है कि “वरिष्ठ नागरिकों को केवल डिजिटल धोखाधड़ी से बचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें डिजिटल और AI युग का सक्रिय भागीदार बनाना आवश्यक है।”
यह पहल न केवल बुजुर्गों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बनाएगी, जो समावेशी विकास के लक्ष्य को हासिल करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments