ईरान में चल रहे युद्ध का असर अब पड़ोसी देश Pakistan में भी साफ दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत हो गई है, जिसके कारण कई पेट्रोल पंप खाली पड़े हैं और लोगों को ईंधन के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है।
मौजूदा हालात में Balochistan, Khyber Pakhtunkhwa, Punjab और Sindh जैसे प्रांतों से पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
पाकिस्तान की तेल जरूरत में ईरानी तेल की बड़ी भूमिका
दरअसल पाकिस्तान की कुल तेल जरूरत का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा ईरान से अवैध रूप से आने वाले तेल से पूरा होता है। अलग-अलग प्रांतों में इसकी निर्भरता और भी ज्यादा है।
- बलूचिस्तान में करीब 80% ईंधन की जरूरत ईरानी तेल से पूरी होती है।
- सिंध में लगभग 20% तेल ईरान से आता है।
- खैबर पख्तूनख्वाह में करीब 18% और
- पंजाब में लगभग 13% ईंधन की जरूरत ईरानी तेल से पूरी होती है।
अवैध तरीके से पाकिस्तान पहुंचता है ईरानी तेल
ईरानी पेट्रोल पाकिस्तान में मिलने वाले पेट्रोल से काफी सस्ता होता है। उदाहरण के तौर पर पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब 266 रुपये प्रति लीटर बताई जा रही है, जबकि ईरानी पेट्रोल करीब 172 रुपये प्रति लीटर में मिल जाता है।
ईरान से सटी सीमा के कारण बलूचिस्तान के कई इलाकों में हर दिन करीब 1 करोड़ लीटर पेट्रोल और डीजल अवैध तरीके से पाकिस्तान लाया जाता है और स्थानीय बाजारों में बेचा जाता है।
हार्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी परेशानी
मौजूदा युद्ध के कारण Strait of Hormuz के आसपास हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। इस वजह से पाकिस्तान को दूसरे रास्तों से भी तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है।
पाकिस्तान सरकार का दावा है कि उसके पास लगभग 24 दिनों का पेट्रोल और डीजल स्टॉक मौजूद है, लेकिन सप्लाई बाधित होने से जमीनी स्तर पर स्थिति खराब होती जा रही है।
बलूचिस्तान में सबसे ज्यादा संकट
सबसे गंभीर हालात बलूचिस्तान में देखने को मिल रहे हैं, जहां 70 प्रतिशत से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो चुका है।
वहीं पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वाह के कई इलाकों में भी पेट्रोल और डीजल की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। कई जगहों पर डीलरों द्वारा जमाखोरी की भी शिकायतें मिल रही हैं।
हालात इतने खराब हैं कि पंजाब के कुछ इलाकों में लोगों की गाड़ियों में 300 रुपये से ज्यादा का पेट्रोल भरने की अनुमति नहीं दी जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सीमित मात्रा में ईंधन मिल सके।


































