पाकिस्तान के अफगानिस्तान से सटे उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र में एक बार फिर बड़ा आत्मघाती हमला हुआ है। शुक्रवार (6 मार्च 2026) को मीरानशाह शहर के एक व्यस्त बाजार के पास स्थित पाकिस्तानी सेना की चेकपोस्ट को निशाना बनाकर यह फिदायीन हमला किया गया। इस धमाके में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, शाम करीब 4:30 बजे एक हमलावर ने विस्फोटकों से भरी मोटरसाइकिल को चश्मा पुल के पास बने सेना के चेकपोस्ट से टकरा दिया। टक्कर के तुरंत बाद जोरदार विस्फोट हुआ, जिसकी चपेट में आसपास का बाजार भी आ गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि कई दुकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।
बताया जा रहा है कि इस हमले में मारे गए 18 लोगों में 5 बच्चे भी शामिल हैं। घायलों को तुरंत जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। पाकिस्तानी सेना ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि हमले में कितने सैनिक हताहत हुए हैं।
इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी उस्तुद उल खोरासन (USK) नाम के आतंकी संगठन ने ली है। यह संगठन इत्तिहाद उल मुजाहिदीन पाकिस्तान (IMP) से जुड़ा माना जाता है और हाफिज गुल बहादुर के नेटवर्क से संबंध रखता है।
जानकारी के मुताबिक हाफिज गुल बहादुर को कभी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी द्वारा अफगान जिहाद के दौरान तैयार किया गया था। शुरुआती दौर में उसने बन्नू स्थित एक ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण लिया और बाद में कई आतंकी संगठनों से जुड़कर गतिविधियां चलाता रहा।
बताया जाता है कि वह एक मदरसा भी चलाता था, जहां से आतंकी भर्ती और प्रशिक्षण दिया जाता था। यहां प्रशिक्षित कुछ लड़ाकों को अफगानिस्तान भेजा जाता था, जबकि अन्य को कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों के साथ जोड़ा जाता था।
बाद में लाल मस्जिद घटना के बाद जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का गठन हुआ, तो हाफिज गुल बहादुर भी उससे जुड़ गया और तब से पाकिस्तान के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष में शामिल रहा है।


































