दुनिया की राजनीति में समय के साथ रिश्तों और रणनीतियों में बड़ा बदलाव आता है। कभी United States ने Atomic bombings of Hiroshima and Nagasaki के दौरान जापान पर परमाणु हमले किए थे, लेकिन आज वही अमेरिका Japan से Iran के बढ़ते परमाणु और क्षेत्रीय संकट में सहयोग मांग रहा है।
मौजूदा हालात में अमेरिका अपने सहयोगी देशों को मिडिल ईस्ट में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसी क्रम में राष्ट्रपति Donald Trump जापान से खासतौर पर रणनीतिक मदद की उम्मीद कर रहे हैं। इस पूरी रणनीति का केंद्र Strait of Hormuz है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है।
अमेरिका जापान से क्या चाहता है?
अमेरिका चाहता है कि जापान खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए माइंसवीपर जहाज और नौसैनिक बल तैनात करे। इसका उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखना और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित होने से बचाना है। अमेरिका का तर्क है कि जापान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर है, इसलिए उसे इस संकट में भूमिका निभानी चाहिए।
जापान क्यों है हिचकिचाहट में?
जापान की स्थिति आसान नहीं है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उसने शांतिवाद और परमाणु निरस्त्रीकरण की नीति अपनाई है। उसका संविधान सैन्य कार्रवाई को केवल आत्मरक्षा तक सीमित करता है। यही वजह है कि सरकार के सामने कानूनी और राजनीतिक बाधाएं मौजूद हैं।
जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi ने भी माना है कि अमेरिका के साथ इस मुद्दे पर बातचीत आसान नहीं है। इसके अलावा, देश की जनता भी किसी बाहरी सैन्य कार्रवाई के पक्ष में नहीं दिख रही है, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया है।
किन शर्तों पर मान सकता है जापान?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जापान अमेरिका की मांगों को स्वीकार करता है, तो वह इसके बदले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत सुरक्षा आश्वासन चाहता है। जापान China को एक उभरते सुरक्षा खतरे के रूप में देखता है, खासकर पूर्वी चीन सागर और ताइवान क्षेत्र को लेकर।
ट्रंप और जापान पीएम की अहम मुलाकात
हाल ही में Sanae Takaichi ने वॉशिंगटन में Donald Trump से मुलाकात की। इस दौरान ईरान संकट, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरे, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई।
जापान ने इस दौरान यह भी दोहराया कि क्षेत्र में शांति बहाल करना सबसे जरूरी है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि जापान अमेरिका के इस आग्रह पर क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में यह संकट किस दिशा में आगे बढ़ता है।


































