
लखनऊ: सरोजनीनगर के विष्णुलोक कॉलोनी (कृष्णा नगर) में आयोजित 161वें ‘आपका विधायक आपके द्वार’ शिविर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जनप्रतिनिधि यदि सीधे जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनें, तो समाधान की प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो सकती है। के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में टीम राजेश्वर ने स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित करते हुए उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की। इस पहल का उद्देश्य केवल शिकायतें एकत्र करना नहीं, बल्कि प्रत्येक समस्या के समाधान के लिए जवाबदेही तय करना और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना है, जिससे जनता का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
43 प्रार्थना पत्र, मौके पर समाधान और त्वरित कार्रवाई का उदाहरण
शिविर के दौरान कुल 43 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जो क्षेत्र की विभिन्न मूलभूत और सामाजिक जरूरतों को दर्शाते हैं। इनमें सड़क, नाली-नाला निर्माण, गैस पाइपलाइन, विद्युत पोल, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, शस्त्र लाइसेंस, मोबाइल सहायता और सामाजिक-आर्थिक सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे। इनमें से 3 मामलों का मौके पर ही समाधान कर प्रशासनिक तत्परता का उदाहरण प्रस्तुत किया गया, जबकि शेष प्रकरणों को संबंधित विभागों को अग्रसारित करते हुए शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए। यह व्यवस्था बताती है कि शिविर केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक प्रभावी समाधान मंच के रूप में कार्य कर रहा है।
स्वास्थ्य सेवा का विस्तार: 108 नागरिकों का निशुल्क नेत्र परीक्षण
शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई। टेंडर पाम हॉस्पिटल के सहयोग से आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में 108 वरिष्ठ नागरिकों की नेत्र जांच की गई और अन्य लोगों को भी चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। इसके अलावा 3 वृद्धजनों के आयुष्मान कार्ड भी मौके पर बनाए गए, जिससे उन्हें भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी। इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि जनसेवा अभियान केवल समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
शिक्षा में उत्कृष्टता को सम्मान, युवाओं को मिली प्रेरणा
शिविर के दौरान इंटरमीडिएट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चार मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। अर्पिता अस्थाना, हर्षिता मिश्रा, प्रत्यूष शुक्ला और आरूष सिंह को साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस प्रकार के सम्मान कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि अन्य छात्रों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और प्रोत्साहन का वातावरण तैयार करती है।
युवा सशक्तिकरण: नए यूथ क्लबों का गठन और खेल सामग्री वितरण
युवाओं को संगठित और सशक्त बनाने की दिशा में भी शिविर में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। 175वां बॉयज यूथ क्लब और 111वां गर्ल्स यूथ क्लब का गठन किया गया। इन क्लबों को क्रिकेट, वॉलीबॉल, फुटबॉल और कैरम जैसी खेल सामग्री प्रदान की गई, जिससे युवाओं में खेल भावना, टीम वर्क और नेतृत्व क्षमता का विकास हो सके। यह पहल युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करने और उन्हें समाज के विकास में भागीदार बनाने का एक प्रभावी माध्यम बन रही है।
सेवा और संवेदनशीलता: ‘तारा शक्ति रसोई’ बनी पहचान
शिविर के दौरान ‘तारा शक्ति निःशुल्क रसोई’ के माध्यम से सभी उपस्थित लोगों को ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया। यह पहल सरोजनीनगर में सेवा और संवेदनशीलता का प्रतीक बन चुकी है। इस प्रकार की व्यवस्थाएं न केवल जरूरतमंद लोगों की सहायता करती हैं, बल्कि समाज में सहयोग और मानवीय मूल्यों को भी मजबूत करती हैं।
जनभागीदारी से मजबूत होता विश्वास और विकास का मॉडल
शिविर में जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी ने इसे और अधिक प्रभावी बनाया। यह जनसेवा अभियान अब सरोजनीनगर में एक मजबूत और भरोसेमंद मॉडल के रूप में उभर रहा है, जहां संवाद, सेवा और समाधान के माध्यम से विकास को गति दी जा रही है। डॉ. राजेश्वर सिंह की इस पहल से यह स्पष्ट है कि जब जनप्रतिनिधि जनता के बीच रहकर कार्य करते हैं, तो विकास की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जन-केंद्रित बनती है।


































