मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर अमेरिका बातचीत और युद्धविराम की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान पर सैन्य कार्रवाई जारी है।
ईरान ने ठुकराया अमेरिकी प्रस्ताव
ईरान ने अमेरिका की 15 सूत्रीय युद्धविराम योजना को खारिज कर दिया है। इसके जवाब में तेहरान ने अपनी 5 शर्तें रखी हैं और साफ कहा है कि वह अपनी शर्तों के बिना युद्ध खत्म नहीं करेगा।xgv
ईरान की 5 प्रमुख शर्तें
- हमले और हिंसा पूरी तरह बंद हो
- भविष्य में दोबारा युद्ध न होने की गारंटी
- युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई
- सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के अधिकार को मान्यता
‘हम तय करेंगे युद्ध का अंत’
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह युद्ध खत्म करने का समय खुद तय करेगा, न कि अमेरिका। ईरानी पक्ष का कहना है कि उसे ट्रंप के बयानों और प्रस्तावों पर भरोसा नहीं है।
अमेरिका का रुख क्या है?
अमेरिकी नेतृत्व की ओर से संकेत मिले हैं कि सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को जल्द खत्म किया जा सकता है, लेकिन इसकी कोई तय समयसीमा सामने नहीं आई है।
- इस बीच अमेरिका ने क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है
- फाइटर जेट और मरीन यूनिट्स को भी सक्रिय किया जा रहा है
भरोसे की कमी क्यों?
ईरान का आरोप है कि अमेरिका बातचीत की बात करते हुए भी सैन्य कार्रवाई जारी रखे हुए है।
- पहले भी बातचीत के बाद हमले हुए
- इसी कारण तेहरान अमेरिकी प्रस्तावों को अविश्वसनीय मान रहा है
‘डबल क्रॉस’ की चर्चा क्यों?
विश्लेषकों के मुताबिक ट्रंप पर “डबल गेम” खेलने के आरोप चार वजहों से लग रहे हैं:
- बातचीत के दावे के बीच हमले जारी
- युद्धविराम की बात के साथ सैन्य ताकत में बढ़ोतरी
- बयानों से बाजार पर असर, लेकिन जमीनी स्थिति अलग
- क्षेत्रीय राजनीति में जटिल गठजोड़ और मध्यस्थों की भूमिका
क्या संकेत दे रही है स्थिति?
मौजूदा हालात बताते हैं कि मिडिल ईस्ट में तनाव अभी कम होने के बजाय और बढ़ सकता है। बातचीत और सैन्य कार्रवाई साथ-साथ चलने से स्थिति और जटिल हो गई है।


































