
- सरोजनीनगर से 56वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा भव्य रूप से रवाना
- विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा का शुभारंभ किया
- ग्रामसभा कुरौनी से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या के लिए हुए प्रस्थान
- ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष और ढोल-नगाड़ों से पूरा क्षेत्र हुआ भक्तिमय
- सेवा, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुकी है यह यात्रा

लखनऊ। सरोजनीनगर एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से सराबोर नजर आया, जब 56वीं ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ का भव्य शुभारंभ हुआ। ग्रामसभा कुरौनी से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का जत्था मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या के लिए रवाना हुआ। इस दौरान पूरा क्षेत्र ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष और ढोल-नगाड़ों की गूंज से राममय हो गया।

यात्रा को सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग को प्रभु श्रीराम से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने इसे सेवा, संस्कार और समर्पण का प्रतीक बताया।

पिछले लगभग तीन वर्षों से निरंतर संचालित हो रही यह यात्रा अब अपनी 56वीं कड़ी तक पहुंच चुकी है। डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर शुरू हुई यह यात्रा आज सरोजनीनगर की एक विशिष्ट पहचान बन चुकी है, जो आधुनिक समय में भी सनातन संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही है।
यह यात्रा विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है, जो आर्थिक या अन्य कारणों से अयोध्या जाकर प्रभु श्रीराम के दर्शन नहीं कर पाते। इस पहल के माध्यम से ऐसे श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके मन में गहरी आस्था और संतोष का भाव दिखाई देता है।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भोजन, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है। अनुशासन और सुव्यवस्था के साथ संचालित यह यात्रा सेवा और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
पूरे आयोजन में भक्ति, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामरथ यात्रा न केवल अयोध्या तक का मार्ग तय कर रही है, बल्कि समाज में एकता, आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ कर रही है।
लगातार जारी यह आध्यात्मिक यात्रा आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही है। सरोजनीनगर से शुरू हुआ यह सेवा अभियान अब जन-आस्था का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है, जो भविष्य में भी इसी तरह लोगों को धर्म, संस्कृति और सेवा के मार्ग पर प्रेरित करता रहेगा।


































