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बिना गोली चलाए अमेरिकी F-35 को जाम करने की तैयारी? चीन की टेक रणनीति को लेकर बड़ा दावा

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच जहां United States और Israel का ध्यान युद्ध और तेल बाजार पर है, वहीं China चुपचाप भविष्य की तकनीकी और सैन्य ताकत बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार चीन की नई आर्थिक-तकनीकी योजना में ऐसे कदम शामिल हैं, जो आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन बदल सकते हैं।

चीन की नई पंचवर्षीय रणनीति

चीन की संसद National People’s Congress of China में 5 मार्च को 141 पन्नों की नई विकास योजना पेश की गई। यह चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का हिस्सा है, जिसमें भविष्य की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता तय करने वाली तकनीकों पर प्रभुत्व हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

विश्लेषकों का दावा

इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट Shanaka Anselm Perera के अनुसार यह दस्तावेज केवल आर्थिक योजना नहीं बल्कि “राष्ट्रीय तकनीकी लामबंदी” जैसा दिखता है। उनके मुताबिक चीन अगले दशक में अपनी पूरी अर्थव्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने की रणनीति बना रहा है।

किन क्षेत्रों पर चीन का फोकस

इस योजना में कई उभरती तकनीकों को प्राथमिकता दी गई है, जिनमें शामिल हैं:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इंडस्ट्री
  • ह्यूमनोइड रोबोटिक्स
  • क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क
  • न्यूक्लियर फ्यूजन रिसर्च
  • ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस टेक्नोलॉजी

रिपोर्ट के मुताबिक केवल AI से जुड़ा उद्योग अगले कुछ वर्षों में 10 ट्रिलियन युआन (लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर) तक पहुंच सकता है।

दुर्लभ खनिजों पर चीन की पकड़

विश्लेषकों का कहना है कि चीन की सबसे बड़ी ताकत रेयर अर्थ मिनरल्स पर उसका नियंत्रण है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, मिसाइल सिस्टम, रडार और आधुनिक लड़ाकू विमानों के लिए बेहद जरूरी होते हैं।

उदाहरण के तौर पर अमेरिकी स्टेल्थ फाइटर जेट Lockheed Martin F‑35 Lightning II के इंजन, सेंसर और हथियार प्रणालियों में बड़ी मात्रा में दुर्लभ धातुओं का इस्तेमाल होता है। यदि इन खनिजों की सप्लाई पर नियंत्रण कड़ा हो जाए, तो उन्नत सैन्य तकनीक के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

चीन की लंबी रणनीति

चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के नेतृत्व में तैयार इस रोडमैप का लक्ष्य अगले 15 वर्षों तक महत्वपूर्ण संसाधनों, रोबोटिक्स और AI को एक केंद्रीकृत प्रणाली में जोड़ना है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर चीन इन तकनीकों और संसाधनों पर नियंत्रण मजबूत करने में सफल हो जाता है, तो भविष्य में वैश्विक तकनीकी और सैन्य प्रतिस्पर्धा में उसे बड़ा फायदा मिल सकता है।

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