Pakistan में आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब आम जनता की जिंदगी पर साफ दिखाई दे रहा है। पहले जहां एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई, वहीं अब दवाओं के दाम में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है।
स्थानीय बाजारों, खासकर Rawalpindi के बोहोर बाजार में दवाओं की कीमतों में 50% से लेकर 500% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर आम लोगों, खासकर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है, जिनके लिए जरूरी दवाएं खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंसुलिन इंजेक्शन डिवाइस की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। इसी तरह विटामिन सप्लीमेंट्स, एसिडिटी की दवाएं, न्यूट्रिशनल टैबलेट्स और थायरॉइड जैसी बीमारियों की दवाओं के दाम में भी तेज इजाफा हुआ है। कई जीवनरक्षक दवाएं अब आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं।
ऊर्जा संकट ने भी हालात और बिगाड़ दिए हैं। Middle East में चल रहे संघर्ष के चलते एलपीजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। 11.67 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत अब 3900 से 5135 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गई है।
गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर परिवहन पर भी पड़ा है। एलपीजी से चलने वाले रिक्शा, बस और मिनी बसों का किराया बढ़ गया है, जिससे आम यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि Iran से गैस सप्लाई में कमी आई है, जो पहले रोजाना 10,000 से 12,000 टन तक होती थी। इससे बाजार में आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतें और बढ़ गई हैं।
हालांकि, कुछ राहत के तौर पर हाल ही में आयातित एलपीजी लेकर जहाज पाकिस्तान पहुंचे हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए महंगाई पर काबू पाना अभी चुनौती बना हुआ है।
कुल मिलाकर, ऊर्जा संकट और दवाओं की बढ़ती कीमतों ने पाकिस्तान में आम लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी को और कठिन बना दिया है।


































