
लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक ने द्वारा दिए गए “ज़हरीला सांप” बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे कांग्रेस की विभाजनकारी और तुष्टिकरण आधारित राजनीति का प्रतीक बताया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान कोई साधारण चूक नहीं, बल्कि उस सोच का परिणाम है, जिसमें वर्षों से वोट बैंक की राजनीति को बढ़ावा दिया गया है। डॉ. सिंह ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास ऐसे अनेक निर्णयों से भरा हुआ है, जहां न्याय और समानता की बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी गई।
उन्होंने उदाहरण देते हुए 1986 के शाह बानो प्रकरण का उल्लेख किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए एक महिला के अधिकारों से समझौता किया गया। इसके साथ ही वक्फ अधिनियम 1995 और 2011 के प्रस्तावित साम्प्रदायिक हिंसा विधेयक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन कदमों ने समाज में संतुलन स्थापित करने के बजाय विवाद और असंतोष को बढ़ावा दिया।
ने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) का लगातार विरोध और तथाकथित “चयनात्मक सेक्युलरिज़्म” की नीति ने देश को एकजुट करने के बजाय समाज में विभाजन की स्थिति पैदा की है।
उन्होंने कहा, “जब राजनीति का आधार तुष्टिकरण हो, तो भाषा में भी कटुता और विषाक्तता आना स्वाभाविक है।”
अंत में उन्होंने कहा कि आज का भारत विकास, कानून के समक्ष समानता और राष्ट्रहित के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि कांग्रेस अब भी पुरानी सोच में उलझी हुई है।
“यह दुर्भाग्यपूर्ण है, पर आश्चर्यजनक नहीं,” उन्होंने कहा।


































