मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका से मिल रहे संदेशों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि उन्हें अमेरिकी पक्ष से लगातार संदेश मिल रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत चल रही है।
एक इंटरव्यू में अराघची ने बताया कि अमेरिकी दूत Steve Witkoff की ओर से उन्हें पहले की तरह ही संदेश भेजे जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने अमेरिका के किसी प्रस्ताव पर न तो जवाब दिया है और न ही कोई शर्त रखी है। उनका कहना है कि ईरान क्षेत्र में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए तैयार है, लेकिन केवल अस्थायी युद्धविराम उसे स्वीकार नहीं है।
अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर ईरान को गंभीर आपत्तियां हैं, क्योंकि पिछले अनुभव अच्छे नहीं रहे। उन्होंने याद दिलाया कि पहले हुए समझौतों से अमेरिका पीछे हट चुका है, जिससे भरोसे की कमी बनी हुई है।
वहीं ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी संकेत दिए कि उनका देश युद्ध को लंबा खींचना नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसकी सुरक्षा की गारंटी और भविष्य में हमलों को रोकने का भरोसा जरूरी है। बिना इन शर्तों के कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है। उनके अनुसार, अगले दो से तीन सप्ताह में स्थिति नियंत्रण में आ सकती है और अमेरिका का मुख्य उद्देश्य—ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना—लगभग पूरा हो चुका है।
इस बीच विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच सीधे संवाद की संभावना भले सीमित हो, लेकिन बैक-चैनल कम्युनिकेशन के जरिए हालात को संभालने की कोशिशें जारी हैं।


































