मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी दी है। ईरान ने साफ कहा है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर दोबारा हमला हुआ, तो वह क्षेत्र के तेल और गैस सेक्टर को पूरी तरह निशाना बनाएगा।
ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमला “बड़ी गलती” है और अगर ऐसा फिर हुआ तो जवाब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक होगा।
इससे पहले दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक South Pars Gas Field पर हमला हुआ था। यह विशाल गैस क्षेत्र बुशहर के पास समुद्र में स्थित है और ईरान-कतर द्वारा साझा किया जाता है।
हमले के बाद ईरान ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को चेतावनी दी कि उनके ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। इसी बीच कतर के रास लफान गैस प्लांट पर मिसाइल हमले की खबर ने वैश्विक चिंता और बढ़ा दी है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा
यह घटनाक्रम दिखाता है कि अब संघर्ष केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई भी सीधे खतरे में आ गई है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना संकट का केंद्र
Strait of Hormuz में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यहां सैकड़ों जहाज फंसे होने की खबर है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। दुनिया के लगभग 20% तेल का निर्यात इसी मार्ग से होता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का संकट पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि मिडिल ईस्ट का यह तनाव अब एक बड़े ऊर्जा संकट का रूप ले सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।


































