
- दुधवा में इको-टूरिज्म के लिए 8.79 करोड़ की पहली किश्त जारी
- इंटरप्रिटेशन सेंटर का आधुनिकीकरण और नया प्रवेश द्वार बनेगा
- महेशपुर वन रेंज में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार
- हाईवे पर साइनेज से पर्यटकों का सफर होगा आसान
- रोजगार, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा फायदा

लखनऊ, 20 मार्च 2026 | विशेष रिपोर्ट (TrueNewsUP) : अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस (21 मार्च) के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तराई क्षेत्र की शान को विश्वस्तरीय इको-टूरिज्म हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 8.79 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी कर दुधवा में पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास को नई रफ्तार दी गई है।
यह पहल न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती प्रदान करेगी।
वन दिवस 2026 की थीम और सरकार का विजन
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस 2026 की थीम “वन और अर्थव्यवस्थाएं” है। इसका उद्देश्य वनों को केवल पर्यावरण तक सीमित न रखकर उन्हें रोजगार, पर्यटन और ग्रामीण विकास से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए लगातार नवाचार कर रही है।
दुधवा इंटरप्रिटेशन सेंटर का होगा कायाकल्प
दुधवा में इंटरप्रिटेशन सेंटर के विकास के लिए 4.49 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है, जिसमें से 3.36 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं।
प्रमुख सुविधाएं:
- भव्य मुख्य प्रवेश द्वार (दुधवा थीम पर आधारित)
- आधुनिक नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर
- स्वागत कक्ष, कैंटीन, सभागार और पुस्तकालय का सौंदर्यीकरण
- थारू जनजाति थीम आधारित सेल्फी प्वाइंट
यह केंद्र पर्यटकों को दुधवा की जैव विविधता और स्थानीय संस्कृति से जोड़ने का प्रमुख माध्यम बनेगा।
महेशपुर वन रेंज में पर्यटन को पंख
में इको-टूरिज्म विकास के लिए 2.39 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत हुई है, जिसमें से 1.78 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
विकसित होंगी ये सुविधाएं:
- पेयजल और बैठने की आधुनिक व्यवस्था
- गज़ीबो और इंटरलॉकिंग पाथवे
- वर्षा जल संचयन प्रणाली
- जानवरों की 3D आकृतियां और सेल्फी पॉइंट
- एलईडी व सोलर स्ट्रीट लाइट्स
यह क्षेत्र जल्द ही पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनकर उभरेगा।
दुधवा मार्ग पर साइनेज से सफर होगा आसान
दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ से आने वाले पर्यटकों के लिए राजमार्गों पर साइनेज (संकेतक बोर्ड) लगाए जाएंगे।
- कुल योजना: 4.88 करोड़ रुपये
- जारी राशि: 3.65 करोड़ रुपये
इससे बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों को रास्ता खोजने में होने वाली दिक्कतें खत्म होंगी और यात्रा अधिक सहज बनेगी।
पर्यटन से आर्थिक समृद्धि की ओर
सरकार का मानना है कि दुधवा और तराई क्षेत्र में इको-टूरिज्म के विकास से:
- स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा
दुधवा नेशनल पार्क में हो रहा यह विकास केवल पर्यटन परियोजना नहीं, बल्कि पर्यावरण, संस्कृति और अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास का मॉडल है। यदि योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो दुधवा जल्द ही देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रमुख इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन बन सकता है।


































